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13 मार्च 2016

एलियंस से किया सेक्स, 13 बच्चे पैदा

अमेरिका में कुछ महिलाओं ने दावा किया है कि उन्‍होंने एलियन के साथ सेक्स किया है। इन महिलाओं ने दावा किया है कि एलियनों से उनके बच्चे भी पैदा हुए हैं। एलियन से शा‍रीरिक संबंध बनाने के बारे में महिलाओं ने कहा है कि यह उनका सबसे अच्‍छा अनुभव था। नीलसन और एलुना नाम की इन महिलाओं ने बताया कि उनके एलियन से कुल 13 बच्‍चे हैं। इन महिलाओं ने दावा किया कि एलियन के साथ उनका संसर्ग बेहद शानदार रहा, उसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है लेकिन यह उत्तेजना से भरा एक अनोखा और बार बार किया जाने वाला अनुभव रहा।
ब्रिगेट नीलसन अमेरिका के शहर एरिजोना और एलुना वर्स लॉस एंजलिस की रहने वाली हैं। साथ ही दोनों हाईब्रिड बेबी समुदाय की सदस्‍य भी हैं। इस समुदाय की सदस्‍य होने की वजह से ही दोनों का मानना है कि उनके बच्‍चे अंतरिक्ष में एलियंस के साथ स्पेसशिप में रहते हैं।
नीलसन का कहना है कि एलियन सिर्फ उन्‍हीं महिलाओं को ले जाते हैं जो जाना चाहती हैं और फिर संबंध बनाना चाहती हैं। उन्‍होंने कहा कि मैं यूं तो अपने पिता के साथ रहती हूं लेकिन हमेशा ही मेरा एलियन के साथ संपर्क बना रहता है। हाईब्रिड बेबी समुदाय की महिलाओं ने अपने बच्‍चों के कुछ चित्र भी बनवाए हैं। इन चित्र में जिन बच्‍चों की कलाकृति बनाई गई है वे दिखते तो इंसान की तरह ही हैं लेकिन उनकी आंखें काली और काफी बड़ी हैं। 




01 मार्च 2016

5 श्रापित खजाने : जो भी गया ढूंढने उसकी हो गई मौत

छुपे हुए खजानो की खोज प्राचीन काल से ही लोगो को अपनी और आकर्षित करती आई है क्योंकि इसमें रहस्य-रोमांच के साथ साथ एकाएक अमीर बनने के भी चांस होते है। अब तक ऐसे छुपे हुए सैकड़ों  खजानों की खोज की भी जा चुकी है। पर कुछ खजाने ऐसे भी है जिन्हें खोजने के चक्कर में अब तक कई लोग अपनी जान गवा चुके है। कई लोग खजाने तक पहुंचे भी, उन्होंने वहां से कुछ हिस्सा निकाला भी पर वो ज़िंदा नहीं बच पाए जबकि अधिकांश लोग खजाने को ढूंढने के दौरान मारे गए।  और यह सिलसिला आज भी जारी है ऐसे ही एक शापित खजाने को ढूंढते हुए सबसे ताज़ा मौत 2012 में डेनवर निवासी जेस केपेन की हुई है। आज हम आपको पांच ऐसे ही श्रापित खजानो के बारे में विस्तार से बताएंगे।
·                    काहुएंगा दर्रा का खजाना  (The Cahuenga Pass Treasure)
इस खजाने की कहानी 1864 से शुरू होती है, जब मैक्सिको के राष्ट्रपति बेनिटो जुआरेज (Benito Juarez) ने अपने चार सैनिकों को एक खजाने के साथ सेन फ्रांस्सिको भेजा था। इसमें सोने के सिक्के और बेशकीमती ज्वेलरी थी। रास्ते में एक सैनिक की मौत हो गई तो तीनों ने बीच रास्तें में खजाने को जमीन के अंदर गाड़ दिया। लेकिन वहां घूम रहे एक व्यक्ति डियागो मोरेना (Diego Morena) ने यह देख लिया। बाद में उसने इस धन को निकाला और लॉस एंजलिस की ऊपरी पहाड़ी पर गाड़ दिया।
उसी रात उसने एक स्वप्न देखा कि  इस खजाने से अगर वह धन लाएगा तो उसकी मौत हो जाएगी। इसके बाद उसकी मौत हो गई। डियागो की मौत के बाद उसके मित्र जीसस मार्टिनेज (Jesus Martinez) ने इस खजाने को पाने के लिए अपने सौतेले पुत्र के साथ जैसे ही खुदाई करना शुरू की उसकी मौत हो गई। इसके बाद जीसस मार्टिनेज के सौतेले बेटे की मौत भी एक फायरिंग में हो गई। इस खजाने का थोड़ा हिस्स 1885 में बास्क शेफर्ड (Basque shepherd) को मिला लेकिन जब वह जहाज से स्पेन जा रहा था तो सोने के सिक्कों के साथ वह समुद्र में डूब गया। इसके बाद आयल एक्सपर्ट हेनरी जोन्स (Henry Jones)  ने 1939 में इस खजाने की खुदाई करानी शुरू की लेकिन 27 नवंबर को उसने आत्महत्या कर ली। बाद में एक और व्यक्ति की मौत हो गई। अगर हम सैनिकों सहित सभी की गिनती करें तो 9 लोग इस खजाने के चक्कर में मर चुके हैं।
·                    ओक आयलैंड के गड्ढे का श्राप (Oak Island Money Pit Curse) :
ओक आयलैंड का रहस्य सबसे पहले 1795 में कुछ किशोर लड़कों द्वारा खोजा गया जिन्होंने कनाडा के नोवा स्कोटिया तट के पास एक छोटे से द्ववेप पर रहस्यमयी रौशनी देखी। जब बच्चे वहां पर पहुंचे तो उन्हें वहां पर ताज़ा खुद हुआ एक खड्डा दिखा। चुकी उस इलाके में लुटेरों का आना जाना रहता था इसलिए लड़कों ने सोचा की यहाँ पर जरूर खजाना गड़ा होगा। उन्होंने उस गड्डे की खुदाई करी तो वो आशर्यचकित रह गए उन्हें खड्डे के अंदर लकड़ी के अवरोधक और नारियल के खोलो की परते मिली तथा मिला एक पत्थर का टुकड़ा जिस पर लिखा हुआ था ‘फोर्टी फीट बिलो टू मिलियन पाउंड्स आर बरीड’ यानी की चालीस फ़ीट की गहराई पर दो मिलियन पाउंड  दफ़न है।
दुनिया भर के बहुत से लोगों ने यहां धन की तलाश की थी, जिनमें अमेरिका के राष्ट्रपति फै्रंकलिन डी रूजवेल्ट (Franklin Delano Roosevelt) भी शामिल थे, हालांकि तब वो राष्ट्रपति नहीं बने थे। आज भी लोग यहां धन की तलाश कर रहे हैं लेकिन किसी को यह पता नहीं है कि किसने यहां धन छिपाया और क्यों छिपाया।
इस खजाने के धन को पाने की कोशिश में पहली मौत का पता 1861 में चला जब पंप फट गया और एक मजदूर की मौत हो गई। एक मेनार्ड कैजर (Maynard Kaizer) नाम के व्यक्ति ने 1951 में जब पत्थर को बांध कर हटा रहा था तो उसकी मौत हो गई। यहां 1965 में एडवंचरर राबर्ट रेस्टाल (adventurer Robert Restall), उसके बेटे और दो काम करने वाले अन्य लोग एक गड्ढे में गिर गए और उनकी मौत हो गई। एक किवदंती यह भी है कि इस खजाना को पाने से पहले सात मौतें होना चाहिए।
·                    द लॉस्ट डचमैन माइन (The Lost Dutchman Mine) :
एक किवदंती के अनुसार एक सोने की खदान अमेरिका के साउथ वेस्टर्न इलाके में है। माना जाता है कि यह सुपरसटीशन माउंटेन (Superstition Mountain) में कहीं है। यह ऐरिजोना में ईस्ट फोनिक्स के पास अपाचे जंक्शन के पास है। यहां की अपाचे जनजातियों (Apache tribes) के बीच यह मान्यता है कि गर्जना का देवता ईष्र्यालु है और किसी को भी इस खजाने के पास जाने नहीं देना चाहता है। स्पेन के फ्रांसिस्को वास्क डी कोरोनाडो (1510-1524) ने जब इस खदान को खोजने की कोशिश की तो उसके लोगों की मौत होने लगी और उनकी लाशों से ढेर लग गए। 1845 में यहां डॉन मिगुएल पेराल्टा (Don Miguel Peralta) को कुछ सोना मिला लेकिन स्थानीय अपाचे आदिवासियों ने उसकी हत्या कर दी और उन्होंने सोने को पूरे इलाके में बिखेर दिया और खदान का प्रवेश द्वार नष्ट कर दिया गया। एक डच व्यक्ति वाल्ज (Jacob Walz) जो जर्मनी से यहां आया था।  उसने 20 साल की तलाश के बाद इस खदान को पाने का दावा किया था, लेकिन इसका पता बताने से पहले ही उसकी मौत हो गई। यहां 1931 में खजाने की तलाश में आए एडोल्फ रुथ(Adolph Ruth) लापता हो गया और दो साल बाद उसकी हड्डियां मिली। लेकिन एक नोट भी मिला जिसमें लिखा था, मैं आया, मैंने देखा, मैं विजयी हुआ। इसका अर्थ यह है कि मौत से पहले वह गोल्ड माइन पाने में सफल रहा। इसके बाद भी बहुत से लोग इस खजाने को पाने के लिए अपनी जान गंवा चुके हैं। इस गोल्ड माइन की तलाश में तीन साल पहले डेनवर निवासी जेस केपेन(Jesse Capen) ने यह अभियान छोड़ दिया था लेकिन शव 2012 में उसका शव मिला।
·                    द अंबेर रूम (The Curse of the Amber Room) :
द अंबेर रूम, सोने का बना एक कमरा नुमा चैम्बर था जिसका निर्माण 1707 में पर्सिया में हुआ था।  द अंबेर रूम के अंदर पूरा काम सोने का था।  इसे कुछ लोग विश्व का आठवां आश्चर्य भी कहते थे।  यह रूस और पर्सिया के बीच शांति संधि के उत्सव के दौरान 1718 में पीटर द गे्रट को गिफ्ट के तौर पर मिली थी। तब से द अंबेर रूम रूस में ही था।  पर द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान 1941 में नाजियों ने इस पर कब्जा कर लिया और इसे सुरक्षित करने के
लिए अलग अलग भागों में बांट दिया। इन समस्त टुकड़ों को 1943 में  एक म्युजियम में प्रदर्शित किया गया। जहाँ से यह पूरा का पूरा द अंबेर रूम गायब हो गया जिसका की आज तक पता नहीं चला है। लेकिन इसके गायब होने के बाद इससे जुड़े लोगो की रहस्यमयी मौतों का सिलसिला शुरू होता है। म्युजियम के संरक्षक अल्फ्रेड रोड और पत्नी की मौत हो जाती है  और वह डॉक्टर गायब हो जाता है, जिसने उनके डेथ सर्टिफिकेट पर हस्ताक्षर किए थे। इस रूम से जुड़े रहे रूसी जनरल गुसेव की रहस्मय परिस्थियों में हुई कार दुर्घटना में मौत हो जाती है। अंबेररूम को खोजने वाले एक जॉर्ज स्टेइन की जंगल में मौत हो जाती है और उसका नग्न शव मिलता है।
·                    चाल्र्स आयलैंड का श्रापित खजाना (The Charles Island Curse) :
अमेरिका में मिलफोर्ड के पास एक छोटा सा  द्वीप है इस पुरे द्वीप को श्रापित माना जाता है।  मैक्सिकन सम्राट गुआजमोजिन ( Mexican Emporer Guatmozin) का धन 1721 में चोरी हो गया था और उसे यहां मल्लाहों ने छिपा दिया था। 1850 में यहां कुछ लोग खजाने की तलाश में पहुंचे तो प्रेत्माओं ने उन्हें मार दिया। उनके यहां पहुंचते ही हड्डियों के ढांचों से आग की लपटे निकलने लगी थी। यहां पर आज तक किसी को खजाना नहीं मिल सका। वहां जाने की कोशिश करने वाले बताते हैं कि वहां रहस्यम लाइट्स दिखाई देती है  और अजीब-अजीब आवाजें सुनाई देती।

·        साभार.....

‘आत्महत्या वाला जंगल’, यहां मरने आते हैं लोग...



टोक्यो। सोचिए, कोई जगह ऐसी हो सकती है, जहां लोग सिर्फ मरने आते हों। वो भी तब, जब वो जगह खूब बदनाम हो। बदनामी भी ऐसी की डर के मारे हालत खराब हो जाए। अब भूत प्रेतों के जंगल में कौन अपनी जान देना चाहता है, पर लगता है जापानियों को ये जंगल बेहद पसंद आता है। ये जंगल है फुजी पहाड़ के पास, जहां हमेशा घना अंधेरा छाया रहता है।
बिल्कुल किसी भूतिया हॉलीवुड फिल्म के सेट की तरह। पर आओकिगाहा नाम का ये जंगल बेहद डरावना है। यहां सरकार ने किसी के भी आने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। किसी तरह की फोटोग्राफी की भी मनाही है। इसके बावजूद हर साल यहां दर्जनों लोग अपनी जान देने किसी न किसी तरह से पहुंच ही जाते हैं।
इस जंगल में नताली डोर्मर नाम की प्रशिक्षित महिला ने एक खोई लड़की को ढूंढने के लिए कदम रखा था। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि ये बेहद घटिया जगह है। मैं जंगल में सिर्फ 5 फिट घुस पाई, जबकि मेरे ड्राइवर ने कदम तक आगे नहीं बढ़ाया। मुझे पेड़ों की तस्वीरें लेनी थी। पर तभी लगा कि जमीन ऊपर उठ रही है। नताली ने कहा कि यहां के बारे में जापानियों का कहना है कि ये बेहद भूतिया जगहें हैं। 16 वर्ग मील तक फैले इस जंगल को दूसरी ही दुनिया कहा जाता है।
यहां साल 2010 में 400 से अधिक लोगों ने जान दी, जो किसी भी साल के मुकाबले सबसे ज्यादा है। हालांकि प्रशासन की कड़ाई के चलते
धीरे धीरे ये आंकड़ा कम होता जा रहा है। आपको बता दे कि जापान में आत्महत्या की प्रवृत्ति सर्वाधिक है। दुनिया के किसी भी देश के मुकाबले। जापान में आत्महत्या के मामले पूरी दुनिया के मुकाबले 60 फीसदी अधिक हैं। ये ब्रिटेन के मुकाबले 3 गुना अधिक है। साल 2014 में कुल 25 हजार जापानियों ने आत्महत्याएं की, यानि प्रतिदिन 70 से भी अधिक आत्महत्याएं।


साभार

28 मार्च 2013

'मौत का त्रिकोण'

संयुक्त राज्य अमेरिका के दक्षिण पूर्वी अटलांटिक महासागर के अक्षांश 25 डिग्री से 45 डिग्री उत्तर तथा देशांतर 55 से 85 डिग्री के बीच फैले 39,00,000 वर्ग किमी के बीच फैली जगह, जोकि एक काल्पनिक त्रिकोण जैसी दिखती है, बरमूडा त्रिकोण अथवा बरमूडा त्रिभुज के नाम से जानी जाती है।
इस त्रिकोण के तीन कोने बरमूडा, मियामी तथा सेन जआनार, पुतौरिका को स्पर्श करते हैं। वर्ष 1854 से इस क्षेत्र में कुछ ऐसी घटनाऍं/दुर्घटनाऍं घटित होती रही हैं कि इसे 'मौत के त्रिकोण' के नाम से जाना जाता है।
बरमूडा त्रिकोण पहली बार विश्व स्तर पर उस समय चर्चा में आया, जब 1964 में आरगोसी नामक पत्रिका में इस पर लेख प्रकाशित हुआ। इस लेख को विसेंट एच गोडिस ने लिखा था। इसके बाद से लगातार सम्पूर्ण विश्व में इस पर इतना कुछ लिखा गया कि 1973 में एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका में भी इसे जगह मिल गई।
बरमूडा त्रिकोण की सबसे विख्यात दुर्घटना 5 सितम्बर 1945 में हुई, जिसमें पॉंच तारपीडो यान नष्ट हो गये थे। उन उड़ानों का नेतृत्व कर रहे चालक ने दुर्घटना होने के पहले अपना संदेश देते हुए कहा था- हम नहीं जानते कि पश्चिम किस दिशा में है। सब कुछ गलत हो गया है। हमें कोई भी दिशा समझ में नहीं आ रही है। हमें अपने अड्डे से 225 मील उत्तर पूर्व में होना चाहिए, लेकिन ऐसा लगता है कि !
और उसके बाद आवाज आनी बंद हो गई। उन यानों का पता लगाने के लिए तुरंत ही मैरिनर फ्लाइंग बोट भेजी गई थी, जिसमें 13 लाग सवार थे। लेकिन वह बोट भी कहँ गई, इसका भी पता नहीं चला।
इस तरह की तमाम घटनाएँ उस क्षेत्र में होने का दावा समय समय पर किया जाता रहा है। लेकिन यह सब किन कारणों से हो रहा है, यह कोई भी बताने में अस्मर्थ रहा है। इस सम्बंध में चार्ल्स बर्लिट्ज ने 1974 में अपनी एक पुस्तक के द्वारा इस रहस्य की पर्तों को खोजने का दावा किया था। उसने अपनी पुस्तक 'दा बरमूडा ट्राइएंगिल मिस्ट्री साल्व्ड' में लिखा था कि यह घटना जैसी बताई जाती है, वैसी है नही। बॉम्बर जहाजों के पायलट अनुभवी नहीं थे। चार्ल्स के अनुसार वे सभी चालक उस क्षेत्र से पूरी तरह से अनभिज्ञ थे और सम्भवत: उनके दिशा सूचक यंत्र में खराबी होने के कारण खराब मौसम में एक दूसरे से टकरा कर नष्ट हो गये।
बहरहाल समय-समय पर इस तरह के ताम दावे इस त्रिकोण के रहस्य को सुलझाने के किए जाते रहे हैं। कुछ रसायन शास्त्रियों क मत है कि उस क्षेत्र में 'मीथेन हाइड्रेट' नामक रसायन इन दुर्घटनाओं का कारण है। समुद्र में बनने वाला यह हाइड्राइट जब अचानक ही फटता है, तो अपने आसपास के सभी जहाजों को चपेट में ले सकता है। यदि इसका क्षेत्रफल काफी बड़ा हो, तो यह बड़े से बड़े जहाज को डुबो भी सकता है।
वैज्ञानिकों का मत है कि हाइड्राइट के विस्फोट के कारण डूबा हुआ जहाज जब समुद्र की अतल गहराई में समा जाता है, तो वहाँ पर बनने वाले हाइड्राइट की तलछट के नीचे दबकर गायब हो जाता है। यही कारण है कि इस तरह से गायब हुए जहाजों का बाद में कोई पता-निशां नहीं मिलता। इस क्षेत्र में होने वाले वायुयानों की दुर्घटना के सम्बंध में वैज्ञानिकों का मत है कि इसी प्रकार जब मीथेन बड़ी मात्रा में वायुमण्डल में फैलती है, तो उसके क्षेत्र में आने वाले यान का मीथेन की सांद्रता के कारण इंजन में ऑक्सीजन का अभाव हो जाने से वह बंद हो जाता है। ऐसी दशा में विमान पर चालक का नियंत्रण समाप्त हो जाता है और वह समुद्र के पेट में समा जाता है। अमेरिकी भौगोलिक सवेक्षण के अनुसार बरमूडा की समुद्र तलहटी में मीथेन का अकूत भण्डार भरा हुआ है। यही वजह है कि वहाँ पर जब-तब इस तरह की दुर्घटनाएँ होती रहती हैं।
बहरहाल इस तर्क से भी सभी वैज्ञानिक सहमत नहीं हैं। यही कारण है कि बरमूडा त्रिकोण अभी भी एक अनसुलझा रहस्य ही बना हुआ है। इस रहस्य से कभी पूरी तरह से पर्दा हटेगा, यह कहना मुश्किल है।

बरमूडा त्रिकोण क्षेत्र में जमीन पर हुई घटनाएं
  1. सन् 1969 में बिमिनी, बाहामास स्थित ग्रेट आइजैक लाइटहाउस पर कार्यरत दो कर्मचारी अचानक लापता हो गये और फिर कभी नहीं मिले।
 बरमूडा त्रिकोण की समुद्री घटनाएं
  1. 4 मार्च 1918: पानी में चलनेवाला अमेरिकी जहाज साइक्लॉप्स, 309 लोगों के साथ गायब हो गया।
  2. 1 दिसंबर 1925: चाल्र्सटन, दक्षिण कैरोलीना से हवाना, क्यूबा के लिए चलने के बाद पानी के जहाज सोटोपैक्सी ने रेडियो सिगल पर संदेश जारी किया कि जहाज डूब रहा है। उसके बाद जहाज की कोई खबर नहीं मिली।
  3. 23 नवंबर 1941: अमेरिकी जहाज प्रोटिअस, 58 लोगों के साथ वर्जिन आइलैंड के लिए चला. इस पर बॉक्साइट लदा हुआ था। दो दिनों बाद इसका कोई पता नहीं चला। इसके अगले महीने उसी कंपनी का दूसरा जहाज नेरेअस 61 लोगों के साथ उसी क्षेत्र के आसपास से लापता हो गया।
  4. 2 फरवरी 1963: सल्फर क्वीन नामक जहाज 15 हजार दो सौ 60 टन सल्फर के साथ ब्यूमोंट, टेक्सास के लिए चला। इस पर चालक दल के 39 सदस्यसवार थे। 4 फरवरी को प्राप्त रेडियो सिग्नलों के अनुसार, यह तेज समुद्री आंधी में फंस गया और इसके दो दिन बाद इसकी कोई खोज-खबर नहीं मिली।
बरमूडा त्रिकोण की वायुयान दुर्घटनाएं
  1. 5 दिसंबर 1945: फ्लाइट 19 में सवार 14 वायु सैनिकों का एक दल लापता हुआ, उसी दिन उसकी तलाश में 13 सदस्यों के साथ निकला पीबीएम मरीनर भी लापता हुआ।
  2. 30 जनवरी 1948: स्टार टाइगर नामक हवाई जहाज चालक दल के छह सदस्यों और 25 यात्रियों के साथ लापता हो गया।
  3. 28 दिसंबर 1948: डगलस डीसी-3 हवाई जहाज चालक दल के तीन सदस्यों और 36 यात्रियों के साथ लापता हुआ।
  4. 17 जनवरी 1949: स्टार एरियल वायुयान चालक दल के सात सदस्यों और 13 यात्रियों के साथ लापता हो गया।

27 मार्च 2013

मां का आंचल



मां रेवा का आंचल आज भी पहले की तरह फैला हुआ था. नर्मदा प्रसाद भागते हुयें आया और धड़ाम से जाकर उसके आंचल में जा गिरा. मां रेवा ने अपना ममतामयी हाथ जब उसके सिर पर फेरा तो वह रो पड़ा. वह कुछ पुछना चाहता था लेकिन उसे जोर की भुख लगी थी. मां रेवा समझ चुकी थी कि उसका लाड़ला भुख से व्याकुल हो रहा है उसने उसके लिए भोजन की थाल परोस दी. भरपेट खाना खाकर वह फिर सो गया. वह ऐसा सोया कि अपने साथ लायें अनेक सवालों को वह भूल गया. जैसे ही भोर होने को आई कि उसे एक बार फिर मां रेवा ने नींद से जगाते हुयें कहा ‘ बेटा नर्मदा जरा उठ तो देख बेटा भोर होने वाली है. जा अपने मालिक के घर वहां उसके कोठे में बंधी पड़े गाय के बछड़े उनके छुटने का इंतजार कर रहे होगें …….! अगर तू नहीं गया तो वे बेचारे भुखे रह जायेगें ……..! सुन  बेटा नर्मदा उन्हे भी तेरी तरह उनकी मां से मिल कर अपनी भुख प्यास को शांत करना है……….. !
अधकचारी नीदं से अलसाय हुयें नर्मदा की बार तो इच्छा हुई कि वह मना कर दे ……… पर उसे तो जाना ही होगा क्योकि उसका मालिक बड़ा ही निर्दय और जालिम किस्म का है. वह जानता है कि एक दिन अगर कोठे से जानवर नहीं छुटेगें तो उसका मालिक उसे मार मार कर लहु लुहान कर देगा. वह डर के मारे उठ कर अपने मालिक के घर की ओर सरपट भागा. उसे आज इतनी जल्दी थी कि वह यह तक भूल गया कि वह यह तक भूल गया कि वह मां रेवा से आज क्या पुछने के लिए आया था.
पौराणिक कथाओं में सदियों से देवी देवताओं की आरध्य रही जगत तारणी पूण्य सलिला मां नर्मदा को रेवा भी कहा जाता है. इसी जग कल्याणकारी मां रेवा के किनारे बसे एक छोेटे से गांव में रहने वाला नर्मदा प्रसाद करीब बीस साल पहले आई बाढ़ में अपने माता – पिता के साथ बहते हुयें इसी गांव के गोपाल मछुआरे को मिला था. नर्मदा प्रसाद के माता -पिता पहले ही दम तोड़ चुके थे. उनकी बहती लाश के साथ नर्मदा प्रसाद भी मछली की तलाश में जाल बिछायें गोपाल के जाल में आकर उलछ गया. गोपाल ने उसे बाहर निकाल कर फेकना चाहा लेकिन उसे उस नन्हे सी जान के शरीर में हलचल होती दिखाई दी. गोपाल अपने मछली के जाल को वही छोड़ कर उस बच्चे को लेकर गांव की ओर सरपट भागा. कुछ दिनो तक चले गांव के वैद्य के इलाज के चलते नर्मदा प्रसाद बच गया लेकिन वैद्य ने गोपाल को चेताया कि इस बच्चे को नदी के पानी से बचायें रखना. पानी देख कर इस बच्चे का शरीर अपने आप हिचकोले मारने लगेगा.
इस रहस्य को गोपाल ने किसी को नही बताया. आज इस घटना को लगभग बीस साल हो गये. ना तो गोपाल उस रहस्य को जान पाया कि उसके बाबा उसे नदी के किनारे जाने से क्यो रोकते थे. नर्मदा कई बार अपने बाबा को बिना बताये एक रहस्य को आज तक छुपायें रखा था कि वह जब भी मां रेवा के किनारे बहती धारा को एकटक निहारता था तो उस बीच धार में एक महिला अपनी बांहे फैलाये उसे अपनी ओर बुलाती थी. जब वह उसकी ओर जाता था तो नदी में अपनी आप रास्ता बन कर निकल आता था. उसे वह महिला कई बार अपने हाथों से  नाना प्रकार के पकवान खिलाती थी तथा अपने ही आंचल में सुलाती थी. उसे जब तक वह इस रहस्य को समझ नहीं सका तब तक ऐसा होता था. लेकिन एक दिन उसे नदी की ओर जाता उसके बाबा ने देख लिया तो उसके बाबा ने उसे बहुॅंत डाटा फटकारा तब से वह नदी के किनारे नही जाता था.
नर्मदा यह नहीं जान सका था कि उसके बाबा उसे क्यों नदी की ओर जाने से रोकते थे तथा नदी कह बीच धारा में बाहे फैलाये उसको बुलाने वाली महिला कौन है. उस महिला से उसका क्या नाता है. नर्मदा के अपने माता – पिता कौन थे इस बारे में उसे कोई जानकारी नही थी. पर उसने गंाव वालों के मुह से सुना था कि बाबा उसके पिता नही है. आज उसके बाबा भी अब इस दुनिया में नहीं रहे. एक रात जब उसे अपने बाबा से जिद करके यह जानने की कोशिश की कि बाबा आप मुझे क्यों नदी के किनारे जाने से रोकते है. तब उसके बाबा ने कहा कि वह कल उसे उस राज को बता देगा जो कि बरसो से उसके दिल के किसी कोने मेे दबा पड़ा है. कल सुबहउठ कर वह अपने बाबा से उस रहस्य को जान पाता इसके पहले ही उसे सुबह उठ कर गंाव के जमींदार के कोठे पर जाकर गाय बछड़ो को छोडना था. अपने वादे के मुताबिक गोपाल उस राज को बताने के पूर्व ही उस दिन चल बसा.
गोपाल बाबा उसे नर्मदा प्रसाद कह कर पुकारते थे.  अपने के नाम के पीछे बाबा कहा करते थे कि बेटा तू मां कौन है ……..! किस जाति का है ………….!  किस गांव का है …………..! तेरे कौन रिश्तेदार है ……………? मैं नहीं जानता. तू मुझे मां नर्मदा की साठ साल की सेवा के बदले में मिला प्रसाद है इसलिए तू मेरा नर्मदा प्रसाद है………! गोपाल के मरने के बाद गंाव वालों ने इस एक बार फिर अनाथ हुयें नर्मदा प्रसाद के बारे में जांच पड़ताल की पर किसी को यह तक नही मालुम कि बाढ ़में बहता मिला यह बच्चा किसका था……? लगभग बीस साल पहले भी गांव वालों ने आसपास के गांवों तक मुनादी करवा दी थी कि जिसके भी परिवार के लोग बाढ़ में बह गयें हो वे आकर इस बच्चे के बारे में जानकारी देकर उसे ले जाना चाहे तो ले जा सकते है. लेकिन कोई नही आया तो गोपाल मछुआरे ने उसे अपने बेटे की तरह पाल पोश कर बड़ा किया था. गोपाल बाबा के मरने के बाद नर्मदा प्रसाद ने जमीदार के घर की नौकरी छोड़ दी वह अपने बाबा के पुश्तैनी काम को करने का बीड़ा उठा कर वह नही की ओर चला गया.
आज एक बार फिर मां रेवा में बाढ़ आई थी. उसका पानी हिलांेरे मार कर इस किनारे से उस किनारे तक अठखेलिया कर रहा था. नर्मदा प्रसाद को ऐसा लगा कि नदी की बीच धारा कोई महिला बाहें फैला कर उसे आंखों के छलकते आंसुओं से पुकार रही है. काफी देर तक उस महिला को अपनी ओर बाहें फैला कर पुकारते देख नर्मदा प्रसाद का शरीर हिचकोले मारने लगा. वह ऊफनती रेवा की बीच धारा में उसे पुकार रही महिला की ओर सरपट भागा. उसे पानी में भागते देख उसके संगी साथी गांव की ओर बद्हवाश से भागे. कुछ ही पल में पुरा गांव मां रेवा के किनारे जमा हो गया. गांव वाले शाम तक रहे पर किसी को भी नर्मदा का अता पता नही मिला तो गंाव वाले खाली हाथ वापस लौट कर आ गयें. गांव वाले कहने लगे बेचारा नर्मदा जहॉ से आया वहीं चला गया. नर्मदा के इस तरह नदी में बह जाने से पुरे गंाव में आज रात किसी के घर पर चुल्हा नही जला. सबके सब उदास थे. लोगो की आंखों के आंसु झर झर कर बह रहे थे. सारे गंाव वाले को आज ऐसा लग रहा था कि उसके परिवार का कोई सदस्य बह गया हो. आज की रात लोगो को पहाडत्र जैसी लग रही थी. कई लोगो ने तो रात भर सोच सोच कर काट ली. हर कोई नर्मदा को लेकर परेशान था.
खुले आसमान के चांद तारों को देख कर रात के पहर कटने के इंतजार करने वाले लोगो को जैसे ही भोर के होने की आहट हुई लोग अपने घरों से बाहर की ओर निकल पडें. हर कोई एक दुसरे की आंखों में झांक कर एक दुसरे को बताना चाह रहा था कि उसने इस काली अमावस्या जैसी रात को कैसे काटा है. गांव वाले अपने घरों से बाहर निकल कर रेवा के किनारे जाकर नर्मदा को तलाशते इसके पहले ही उन्हे रेवा के तट की ओर गंाव को आते रास्ते एक युवक आता हुआ दिखाई दिया. पास आने पर ऐसा लगा कि आने वाला कोई नही अपना नर्मदा है तो सारा गांव खुशी के मारे उसकी ओर दौड़ पड़ा.
नर्मदा को जिंदा देख कर गांव की महिलाआंे के अंाचल भर आयें. गांव वाले दिल धडकने लगे. नर्मदा को जिंदा देख कर सब के सब प्रसन्नचित थे वही हर छोटे बडें सबके चेहरे पर एक जिज्ञासा झलक रही थी कि नर्मदा तू रात भर कहॉ था………?  वह मंा रेवा की ऊफनती धारा की ओर क्यों भागा था…..!  उसके साथ क्या हुआ…….! नर्मदा ने इस तरह सारे गांव वालों  को अपनी ओर जिज्ञासा भरी निगाहों से देख तो वह कुछ पल के लिए डर गया. उसने डरते डरते गंाव वालों से पुछा  पुछा इतनी सुबह पुरा गंाव कहॉ जा रहा है……..? उसके सवालों को सुन कर केतकी आजी रो पड़ी उसने नर्मदा के सिर पर हाथ फेर कर कहा बेटा हम तुझे ही ढुढ़ने जा रहे थे…….! तू रात भर से घर नहीं आया था……..! कल तेरे साथ गयें कुछ लड़को ने तुझे ऊफनती रेवा की बीच धारा में भागते हुयें देखा तब से पुरा गांव परेशान है.
केतकी आजी के बताने पर कुछ याद आया.उसने बताया कि कल जब वह रेवा के किनारे मछली का जाल बिछाने गया था तब उसने देख कि नदी में बाढ़ आई थी. नदी की बीच धार में कोई महिला मुझे बांहे फैला कर अपनी ओर बुला रही है ………! मैं उसकी ओर भागा……. उसके बाद मुझे पता नही कि क्या हुआ………..? मुझे जब होश तब मैंने अपने आप को नदी के  दुसरे छोर पर पाया.मुझे आसपास चीखते सन्नाटे में समझ आया कि मैं जिस स्थान पर लेटा हू उसके आसपास कोई नदी बह रही है. दिमाग पर काफी जोर देने के बाद मुझे पता चला कि मैं जिस स्थान पर लेटा हुआ था उससे चार पांच फंलाग की दूरी पर मां रेवा बह रही है. मुझे डर लग रहा था मैं थर थर कर कांपते कांपते खुले आसमान में चन्द्रा के प्रकाश में उस भयावह चीखते सन्नाटे को चीरते हुयें नदी के किनारे आने के लिए निकल पड़ा . खुले आसमान में दिखने वाली चांदनी बता रही थी कि रात का तीसरा पहर बीत चुका है. चौथे पहर के शुरू होते ही मैंने अपने घर की ओर आने का मन बना कर मै जैसे नदी के किनारे आया तो मेरी सिटट्ी पिटट्ी गुम हो गई. कल की तरह आज भी मां रेवा पुरे उफान पर बह रही थी.चन्द्रमा के प्रकाश में साफ दिख रहा था कि मां रेवा नदी की धार में काफी बहाव था. नदी अपने अपने दोनो किनारों के उपर से बह रही थी. मुझे इस नदी पार करके गांव की ओर आना था. मुझे तो तैर कर नदी पार करना भी नहीं आता था. अब मेरे लिए नदी पार करके आना बड़ा ही कठीन काम था. मैं इसी उधेड़बुन में कुछ सोच रहा था कि मुझे ऐसे लगा कि कोई मेरा नाम लेकर पुकार रहा है.
मैने आसपास चारों ओर चन्द्रमा के प्रकाश में अपनी निगाहे घुमा कर देखा तो मुझे कोई भी दिखाई नहीं दिया. सुनसान इलाके में जब किसी ने मेरा नाम लेकर एक बार फिर किसी ने मुझे पुकारा तो घबरा गया. इस बार की आवाज किसी महिला की थी. मैं उस अपरिचित महिला की आवाज को पहचानने की कोशिस कर रहा था कि इतने में वह आवाज एक बार फिर मुझे सुनाई दी. वह अपरिचित आवाज मुझसे कह रही थी बेटा ‘ नर्मदा तू उस पार जाना चाहता है तो , नदी की बीच धार को पार करके चले आ. ’ मैं नदी के किनारे को छुती उसकी धार तक आने की हिम्मत तक नहीं कर पा रहा था. ऐसे में किसी ने मेरी किसी अदृश्य परछाई ने मेरी बांह पकड़ी और मुझे नदी की धार तक ले आया. मैंने जैसे ही नदी में पांव रखा कि चमत्कार हो गया . नदी के बीचो बीच में एक पगडंडी निकल आई जिस पर मैं चलकर नदी के इस छोर से दुसरे छोर तक चला आया. मैने जैसे पलटकर देखा तो मां रेवा उसी गति से शोर मचाती बह रही थी. मैं नदी पार कर सीधा चला आ रहा हूॅं.
नर्मदा की बात को सुन कर गांव वालों का आश्चर्य का ठिकाना नही था. इतने साल से मां रेवा के किनारे रहते हो गयें लेकिन उन्हे आज तक मां रेवा ने कभी दर्शन तक नहीं दियें और इस लड़के की किस्मत तो देखियें कि यह उसकी गोद में खेल आया है. नर्मदा की बताई बातों को ध्यान पूर्वक सुन रहे पुरे गांव को जैसे लकवा मार गया. गांव वालों के लिए नर्मदा की बताई बाते किसी अनहोनी घटना से कम नही थी. पुरा गंाव नर्मदा की बातों को सुन कर नर्मदा मैया की जय जय कार करते नदी के किनारे की ओर दौड़ पड़ा.आज इस घटना को बीते कई साल हो गयें लेकिन गांव में अब भी मां रेवा के किनारे एक घास फुस की झोपड़ी बना कर रह रहा नर्मदा को विश्वास है कि वह एक बार अपनी अंतिम सांस मां रेवा के आंचल में ही लेगा. उसे हर पल इंतजार है कि कब मां रेवा उसे एक बार फिर पुकार कर कहे बेटा नर्मदा आ अब विश्राम कर ले.
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